मलेरिया के लक्षण व पहचान : 10 Symptoms Of Malaria in Hindi

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मलेरिया के लक्षण और कारण इन हिंदी – मलेरिया बुखार जो की जानलेवा बिमारियों में गिनी जाती हैं. यहां हम आपको इसके बारे में पूरी जानकारी देंगे यह कैसे फैलता हैं, इस के लक्षण कारण क्या होते हैं और इससे कैसे बचा जा सकता हैं आदि मलेरिया के बारे में total information & guide  देंगे. इसके साथ ही आप इस पोस्ट को पूरा पड़ने के बाद यहां पर “मलेरिया का जड़ से इलाज के बारे में भी जान सकते हैं. हमने यहां मलेरिया रोग से कैसे बचे इस संबंध में पूरी जानकारी दी हैं how to treat malaria patients.

  • आप यह पोस्ट पूरा निचे तक पड़ें कुछ भी न छोड़े :

मलेरिया कैसे फैलता हैं

  • (Anopheles mosquito) मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से हमें मलेरिया बुखार आता हैं.
  • इस मच्छर के खून में परजीवी बैक्टीरिया होते हैं. जब यह हमे काटती है तो इसके मुंह के जरिये वह परजीवी हमारे शरीर में भी पहुंच जाते हैं.
  • फिर धीरे-धीरे यह परजीवी बैक्टीरिया शरीर में पहुंचकर अपनी संख्या बढ़ाता हैं.
  • शरीर में जब इस परजीवी की संख्या बढ़ जाती हैं तो मलेरिया बुखार हो जाता हैं.
  • यह परजीवी लार के जरिये शरीर में पहुंचते ही अपना काम शुरू कर देते हैं, यह सबसे पहले लिवर पर हमला बोलते हैं.
  • यह परजीवी अपना पूरा असर यानी lakshan को शरीर पर दिखाने में  8-12 दिन तक का समय लेते हैं malaria symptoms in Hindi language.
Malaria Anopheles mosquito

मलेरिया परजीवी वायरस की प्रजातियां

  1. (V)Plasmodium Vivax
  2. (O)Plasmodium Ovale
  3. (F) Plasmodium Falciparum
  4. (K) Plasmodium Knowlesi
  5. (M) Plasmodium Malarie

India में ज्यादातर Plasmodium Vivax व Plasmodium Falciparum से फैलता हैं.

मलेरिया के लक्षण और कारण

Malaria Symptoms  in Hindi

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मलेरिया बीमारी की पहचान ऐसे करे 

  1. यह बुखार ठण्ड लग कर आता हैं, पूरा शरीर कांपने लगता हैं.
  2. शरीर की त्वचा ठंडी पढ़ने लगती हैं.
  3. जी मचलना, उलटी होना आदि होने लगते है
  4. सर दर्द होने लगता हैं, जो धीरे-धीरे तेज हो जाता हैं
  5. शरीर थकान से भर जाता हैं. पूरा शरीर कमजोर होने लगता हैं
  6. बहुत बार मलेरिया के शुरूआती लक्षण में आंखे लाल भी होने लगती हैं
  7. बुखार तेजी से चढ़कर 102 डिग्री से 106 डिग्री Ferenahit तक पहुंच जाता हैं. इस अवस्था में मरीज कोमा (बेहोशी) में भी जा सकता हैं.

मलेरिया बुखार का कारण : मलेरिया मच्छर का काटना ही इसका कारण होता है और दूसरा कारण है कमजोर रोगप्रतिरोधक क्षमता. जिस भी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होगी उसको बार बार और जरा से मौसम के परिवर्तन से बुखार आजायेगा, सर्दी हो जाएगी.

मलेरिया बीमारी के बुरे असर (Negative Effects)

  1. खून की कमी (अनीमिया) हो जाती हैं और कमजोरी आ जाती हैं.
  2. जिगर और तिल्ली बढ़ जाती हैं
  3. समय से उपचार न लेने से मलेरिया जानलेवा भी हो सकता हैं
  4. मलेरियाजन्य अनीमिया से गर्भवती महिलाओ में गर्भपात भी हो सकता हैं
  5. पूरा शरीर बुरी तरह से कमजोर हो जाता हैं
  6. मलेरिया का किडनी पर नकारात्मक लक्षण होता है
  7. पाचन तंत्र भी बिगड़ जाता है
  8. इस रोग का याददाश्त पर भी असर पढता है भूलने के लक्षण हो सकते है

मलेरिया हो जाने पर क्या करे

जब आपको ऊपर बताये गए मलेरिया बुखार के लक्षण अपने शरीर में नजर आने लगे तो अपने नजदीकी डॉक्टर से चेक उप करवाये. फिर डॉक्टर आपको ब्लड टेस्ट के लिए भेजेंगे वहां आपके खून की जांच होगी. फिर इस जाँच के आधार पर डॉक्टर आपका सफल Treatment कर देगा.

बारिश के मौसम में आप रोजाना सुबह खाली पेट 7-8 तुलसी के पत्ते खाये, इसको खाने के बाद 20-25 मिनट तक कुछ भी न खाये पिए तो आपकी रोगप्रतिरोधक क्षमता तेज हो जाएगी. अगर कोई रोजाना पुरे साल तुलसी का सेवन करे तो उसे मलेरिया मच्छर काटने पर भी कुछ नहीं होता क्योंकि इसक रोगप्रतिरोधक क्षमता इतनी बढ़ जाती है की वह मलेरिया वायरस से लड़कर उसे बाहर कर देती है इसलिए आप मलेरिया के उपचार और लक्षण में यह जरूर करे.

मलेरिया मच्छर का जीवन चक्र

  • मच्छर की विभिन्न अवस्थाये

मादा एनाफिलीज मच्छर अपने अंडे रुके हुए साफ़ पानी, जैसे-पोखर, तालाब, झील के किनारे, कुवे, नदी नाले, टंकी आदि में देती हैं. ये अंडे आकार में छोटे होते हैं व पानी की सतह पर तैरते रहते हैं. सामान्यतः पानी के किनारों पर व अंदर कई तरह के पौंधे, घास उगी होती हैं. जहां अण्डों व लार्वा को रुकने का स्थान मिलता हैं.

अंडे देने के 24 से 48 घंटो में अंडे से लार्वा निकलने लगता हैं, लार्वा 5-6 दिनों में प्यूपा में परिवर्तित हो जाते है जो पानी में डुबकी लगाते रहते हैं. प्यूपा से 2-3 दिनों में वयस्क मच्छर बनकर उड़ जाता है. वयस्क मच्छर सतह से के 45 कोण पर विश्राम करता है. इस तरह अंडे से मच्छर बनने में 9-11 दिन का समय लग जाता है. पानी की सतह में इनके शत्रु गम्बूशिया मछली होते हैं जो इनको अंडो, लार्वा व प्यूजो अवस्था में ही खा सकती हैं.

मच्छर कहां पैदा होते हैं (Malaria Machhar)

  • छत पर रखी पानी की खुली टंकियों में
  • बेकार फेंके हुए टायर में जमा पानी में
  • कूलर में
  • किचन गार्डन में रुके हुए पानी में
  • सजावट के लिए बने फव्वारे में
  • गमले व फूलदान में
  • टूटे बर्तन, मटके, कुल्हड़ गमले में
  • बिना ढंके बर्तन में
  • ऐसी हर जगह जहां पर पानी रुक हुवा होता हैं वहां मच्छरों के पैदा होने की पूरी सम्भावना होती हैं
  • इसलिए अपने पुरे घर में जमा हुआ पानी न रहने दें, रोजाना सफाई करे.

ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छर कहां पैदा होते हैं

  1. हैंडपंप और नाल के आस-पास रुके हुए पानी में
  2. प्रयोग में न आने वाले पानी के कुए में
  3. पशुओं के पानी पीने के होद टंकी में
  4. खुरों की छाप में जमा पानी में
  5. धान के खेत में, रुके पानी में
  6. घर के आस-पास जगह भी एक सप्ताह से अधिक पानी रुका हो
  7. बारिश में पेड़ों के खोखल और छेद में जमा पानी में
  8. नालियों के ठहरे हुए पानी में
  9. नहरों के रुके हुए पानी में

मच्छरों से स्वयं का बचाव कैसे करे

  1. रात में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करे
  2. अपने घरों की खिड़कियों और दरवाजों में मच्छरप्रूफ जालियां लगवाये
  3. नारियल और सरसों के तैल में निम का तैल मिलकर या मच्छर को भागने वाली क्रीम का शरीर के खुल हिस्सों पर लेप करे
  4. शाम को घर में निम की पत्तियों का धुआं करे, मच्छर की अगरबत्ती का उपयोग करे
  5. शरीर पर कपडे ऐसे पहने जिससे पूरा शरीर ढंका हुआ रहे
Mosquito Coil

घर में मच्छरों को पैदा होने से कैसे रोक जा सकता हैं

  • सप्ताह में एक बार अपने टिन, बाल्टी, डिब्बा आदि का पानी खाली कर दें और दुबारा इस्तेमाल से पहले उन्हें अच्छी तरह से सुखाये
  • छत पर रखी पानी की टंकी को ढांक कर रखें, ताकि मच्छर अंदर घुसकर अंडे न दे सके
  • सप्ताह में एक बार अपने कूलर का पानी खाली कर दें और फिर सुखाकर ही पानी भर दें
  • खाली बर्तन टिन आदि में बारिश का पानी जमा न होने दें

घर के आस पास

  1. हैंडपंप के आस-पास पानी इकट्ठा न होने दें, नाली बनाकर बहा दें
  2. जिन स्थानों से पानी नहीं निकाला जा सकता वहां पानी की सतह पर मिटटी का तैल और जला हुआ इंजन का तैल डालें
  3. पुराने टायरों आदि में बारिश का पानी जमा न होने दें, पॉलीथिन से ढंक कर रखे
  4. छोटे तालाबों, कुण्डों, पोखरों, कुए आदि में लार्वाभक्षी गम्बूशिया मछलिया डालें
  5. घर के आस-पास के गड्ढों को मिटटी से भर दें
ऐसे पानी पर मच्छर पैदा होते हैं

मच्छरों को भगाने के लिए दवायुक्त मच्छर दानी

  • मलेरिया से बचा रहे आपका परिवार, दवायुक्त मच्छरदानी करे मच्छरों पर वार.
  • रात को सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करे, क्योंकि मलेरिया फैलाने वाले मच्छर रात में ही काटते हैं.
  • गर्भवती महिलाये और बच्चे भी अवश्य ही मच्छरदानी लगाकर सोये

मच्छरदानी को दवायुक्त बनाने की विधि

  • सिंथेटिक पायरेथयरॉयड फ्लो 2.5 प्रतिशत को पानी में मिलाकर घोल बनाया जा सकता है
  • Singel Bed मच्छरदानी के लिए 10 मि.ली सिंथेटिक पायरेथयरॉइडफ्लो 2.5 और 350-500 मि.ली पानी मिलाकर घोल तैय्यार किया जा सकता हैं.
  • Bouble bed मच्छरदानी के लिए 15 मि.ली सिंथेटिक पयथयरॉइड फ्लो 2.5 और 500-750 मि.ली पानी मिलाकर घोल तैयार किया जा सकता हैं.

लार्वाभक्षी गम्बूशिया मछलियां

  • गम्बूशिया, गप्पी नामक मछलियां मच्छरों के लार्वा खा जाती हैं.
  • घर की टंकियों, कुओं, घर के आस-पास के गड्ढों व तालाबों में इन मछलियों को छोड़ देने से मच्छर बहुत कम हो जाते हैं.
  • गांव के तालाबों, गड्ढों में लार्वाभक्षी मछलियां डालने के लिए मलेरिया विभाग के कार्यकर्त्ता से संपर्क करे.

मलेरिया फैलाने वाले एनाफिलीज मच्छरों की आदतें

  • यह मलेरिया वाहक मादा मच्छर साफ़ रुके हुए पानी में पैदा होते हैं
  • (A) मलेरिया वाहक मादा मच्छर शाम के झटपुटे में या रात को काटता हैं
  • मच्छर आराम के लिए अंधेरी और छायादार जगहों को पसंद करता है
  • खून चूसने की तलाश में यह अपने पैदा होने की जगह से एक से लेकर तीन किलो मीटर तक उड़ सकता हैं
  • खून चूसने के बाद मादा मच्छर घर में किसी जगह पर थोड़ा आराम करना पसंद करता है
  • मलेरिया वाहक मादा मच्छर आगे की और झुककर आराम करता है जैसे वह अपने सर के बल बैठा हो. यह मच्छर ही मलेरिया होने का कारण हैं.
  • दिन में मलेरिया का मच्छर अंधी, ठन्डे और नम स्थान जैसे पशुघर, अंधेरे कमरे, भंडार घर, पेड़ों के खोखले कोटर, वनस्पति से ढंके
  • स्थानों, घरों के फर्नीचर, पार्डन धान की कोठियों आदि के निचे विश्राम करते हैं.

उम्मीद हैं दोस्तों आपको मलेरिया के लक्षण क्या है और कारण malaria symptoms in Hindi इसके बारे में पढ़कर बहुत अच्छा लगा हो. इसके साथ हमने इस रोग से छुटकारा पाने के लिए घरेलु उपचार भी बताये हैं जो की आप निचे रिलेटेड पोस्ट्स सेक्शन में जाकर पढ़ सकते हैं,

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