जिबान पर जीभ का लकवा – Tongue Paralysis in Hindi

जीभ का लकवा,
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पढ़िए जिव्हा जीभ का लकवा के लक्षण और उपाय के बारे में, क्या होता हैं इसमें लक्षण व जानकारी. लकवा बहुत ही बेकार रोग हैं, यह जीवन को मुद्रा बना देता हैं. हमारी यही दुआ हैं की किसी को यह रोग न हो, अगर हो गया हो तो जल्द ही उनको आराम मिले.

जिबान जीभ का लकवा लक्षण कारण और इलाज

Tongue Paralysis Treatment in Hindi

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जिव वाणी की वाहक शिराओं में लकवा मार देता हैं, तो जीभ अकड़ जाती हैं. तब बोलने में तकलीफ होती हैं और मनुष्य बोलते वक्त तुतलाने लगता हैं. रोग के उग्र रूप धारण करने पर वाणी के साथ साथ भोजन भी रूक जाता हैं. कभी कभी तो इस लकवा के कारण रोगी का बोलना भी बिलकुल ही बंद हो जाता हैं. उस हालत में रोगी सुन तो सकता हैं, पर बोल नहीं पाता.

कब होता हैं जीभ में लकवा

  • इस तरह का लकवा जनमात भी हो सकता हैं और जन्म के बाद भी हो सकता हैं. जनजात लकवा का पता सामान्यत: शिशु के बोलने की सामान्य आयु पर ही चल जाता हैं और जन्म के बाद हुआ लकवा अधिकतर 50 साल या इससे ज्यादा की उम्र होने पर ही घटित हो सकता हैं tongue paralysis treatment symptoms in Hindi.
  • एक बाद यह भी हैं की इस नियम के उपवाद भी हो सकते हैं यानी जिबान का लकवा किसी भी आयु में किसी भी व्यक्ति को हो सकता हैं. यह लकवा मस्तिष्क की क्षति के कारण प्रकाश में आता हैं, जो की किसी भी आयु में किसी भी व्यक्ति को हो सकता हैं. मस्तिष्क की क्षति किसी भी तरह की दुर्घटना के फलस्वरूप हो सकती हैं.
  • जैसे, छत से गिरना, जीने से फिसल पढ़ना, सिर में किसी तरह से कड़ी चोट लगना आदि. इन दुर्घटनाओं के परिणामस्वरूप या किसी अन्य कारण से मस्तिष्क का वह भाग, जिस भाग के तंतुओं द्वारा जिन्हे संचालित होती है, क्षत्रिग्रस्त हो जाता हैं. फलतः जिंबाण का स्वाभाविक कार्य ठप हो जाता हैं और वह अक्रिय हो जाती हैं (इसी निष्क्रियता के चलते जीभ में लकवा लग जाता हैं, मार जाता हैं).

 

  • जीभ के लकवा के कुछ रोगियों में कभी कभी यह भी देखा गया हैं की पाठन तो सामान्य हो जाता हैं और वाणी भी लगभग सामान्य ही होती हैं, लेकिन वस्तुओं स्थानों तथा क्रियाओं के नामो के उच्चारण में रोगी को कठिनाई अनुभव होती हैं.

नाम लेने में आती हैं परेशानियां

  • वह या तो इन नामों को बिलकुल ही नहीं बोल पाता या एक संज्ञा के स्थान पर वह दूसरी संज्ञा का प्रयोग कर देता हैं, पर ऐसी स्थिति में भी रोगी को उस संज्ञा का पूरा पूरा ज्ञान रहता हैं. वह उसके प्रयोग और रूप के विषय में हर बात जानता हैं, लेकिन केवल उसे नाम दे पाने में ही अपने को असमर्थ पाता हैं.
  • अगर कोई दूसरा व्यक्ति रोगी के सामने कई वस्तुओं को रखकर और उनमें से एक एक का नाम स्वयं लेता हैं तो रोगी को यह बताने में कठिनाई नहीं होती की उस नाम की वस्तु कौन सि हैं??? ऐसा देख कर निश्चय ही आश्चर्य होता हैं. हम उसे गलती से रोगी की मानसिक विकृति समझ लेते हैं, जब की वास्तव में वह भी एक तरह का लकवा ही हैं.

 

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तो आपको jibh ka lakwa or ilaj tongue paralysis in Hindi के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी. आप इसका पिछले पेज भी पड़ें वहां पर आपको इसके इलाज के बारे में भी जानकारी मिल जाएगी.

Submitted By Name : Dr. Sudeep Mehta (Ayurvedic)

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